आज का पंचांग | Aaj Ka Panchang
दैनिक तिथि, नक्षत्र, करण, योग, अभिजित मुहूर्त, राहु काल, सूर्योदय-सूर्यास्त और लाइव वैदिक घड़ी की प्रामाणिक खगोलीय गणना।
✨ शुभ मुहूर्त (Auspicious)
कार्य सिद्धि⚠️ अशुभ मुहूर्त (Inauspicious)
कार्य वर्जित📜 पंचांग के पांच अंग
सटीक समयावधि🪔 आने वाले व्रत एवं त्योहार
2026 पर्वगुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव और बृहस्पति की कृपा प्राप्त कराने वाला है। ज्ञान व सफलता में वृद्धि होती है।
प्रत्येक कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि व्रत। चार प्रहर पूजा से दांपत्य जीवन में सुख और मनोकामना पूर्ति होती है।
पितृ पक्ष का समापन दिवस। सभी ज्ञात व अज्ञात पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान। अगले दिन से नवरात्रि का प्रारंभ।
प्रतिपदा तिथि से मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का महापर्व। कलश स्थापना का शुभ समय प्रातः 06:21 से 10:14 तक।
मूल नक्षत्र में मां सरस्वती का आवाहन। महाष्टमी पर महागौरी पूजन व संधि पूजा संपन्न की जाती है।
अधर्म पर धर्म की विजय। शस्त्र पूजन, शमी पूजन और अपराजिता पूजा का मंगलकारी दिन।
इस रात्रि अमृत वर्षा की मान्यता। खुले आसमान के नीचे खीर रखकर मां लक्ष्मी का जागरण किया जाता है।
अखंड सौभाग्य व पति की दीर्घायु हेतु सुहागिनों द्वारा निर्जला व्रत। रात्रि चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है।
धनत्रयोदशी पर कुबेर व धन्वंतरि पूजा। कार्तिक अमावस्या को स्थिर वृषभ लग्न में महालक्ष्मी-गणेश पूजन।
🛕 आगामी विशेष पूजा व अनुष्ठान मुहूर्त
शास्त्र सम्मत विधानश्री सिद्धिविनायक मंदिर, उज्जैन
विघ्न निवारण व कार्य सिद्धि हेतु गणपति अथर्वशीर्ष पाठ व दुर्वा अर्पण।
सौभाग्य गणपति मंदिर, प्रयागराज
राहु-केतु दोष निवारण, मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द के लिए विशेष पूजन।
उच्छिष्ट गणपति मंदिर, उज्जैन
अकस्मात संकट, भय व व्यापारिक अवरोधों के निवारण हेतु भस्म आहुति विधान।
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❓ सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
पंचांग क्या है? ▼
पंचांग एक पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है जो सौर और चंद्र गति पर आधारित पांच प्रमुख खगोलीय अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण) की गणना करता है। यह दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों के समय निर्धारण के लिए आधार माना गया है।
पंचांग कैसे देखें? ▼
पंचांग देखने के लिए सबसे पहले अपने शहर का चयन करें ताकि स्थानीय सूर्योदय का सटीक समय प्राप्त हो सके। इसके बाद उस दिन की तिथि, नक्षत्र और चौघड़िया देखकर शुभ समय (जैसे अभिजित मुहूर्त) का चयन करें और राहु काल से बचें।
पंचांग के पांच अंग (अंग) क्या हैं? ▼
पंचांग के पांच अंग हैं: 1. तिथि (चंद्र दिवस), 2. वार (सौर सप्ताह का दिन), 3. नक्षत्र (चंद्रमा का नक्षत्र वास), 4. योग (सूर्य और चंद्र देशांतर का योग), तथा 5. करण (एक तिथि का आधा भाग)।
अलग-अलग शहरों में पंचांग समय में अंतर क्यों आता है? ▼
प्रत्येक शहर के अक्षांश और देशांतर भिन्न होते हैं, जिससे स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बदल जाता है। चूंकि वैदिक मुहूर्त दिनमान को अनुपातिक रूप से बांटते हैं, इसलिए दिल्ली, मुंबई, वाराणसी या कोलकाता में समय में कुछ मिनटों का अंतर आता है।